फिल्म समीक्षा – भूलन द मेज

फिल्म समीक्षा : भूलन द मेज


झकझोर कर रख देने वाली एक चमत्कारिक फिल्म:-

CGFilm.in | (एकान्त चौहान)। वैसे तो फिल्में आती और जाती है। पर कुछेक फिल्में ऐसी होती है, जो दिलो-दिमाग को झकझोर कर रख देती है। मनोज वर्मा की राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त भूलन- द मेज एक ऐसी ही फिल्म है, जो कई सालों तक दर्शकों के दिलो-दिमाग में छाई रहेगी। फिल्म में मनोज वर्माजी ने डायरेक्शन का जो हुनर दिखाया है, वह काफी चमत्कारिक है। परदे पर हर किरदार आपको जीवंत लगेगा। रियलिस्टिक टच देती यह फिल्म नि:संदेह सभी को पसंद आएगी।  


आपको बता दें कि भूलन द मेज को 67वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में रीजनल सिनेमा कैटेगिरी में बेस्ट फिल्म का अवॉर्ड मिला है। इस फिल्म की कहानी लीक से एकदम हटकर है। भूलन द मेज के जरिए यह संदेश दिया गया है कि हमारी न्याय व्यवस्था का पांव भी भूलन कांदा पर पड़ गया है और उसे छूकर जगाने की सख्त जरूरत है। छत्तीसगढ़ में पाए जाने वाले भूलन कांदा पर बनी इस फिल्म का स्क्रीन प्ले बिल्कुल सधा हुआ है। भूलन कांदा के बारे में जिस अंदाज और स्टेप-बाय-स्टेप फिल्मांकन करते हुए न्याय व्यवस्था तक पहुंचाया गया है, यह वाकई तारीफ करने लायक है।

कहानी:-


फिल्म की कहानी ग्रामीण परिवेश पर आधारित है। जिसमें छत्तीसगढ़ के रहन-सहन को बहुत ही सुंदर ढंग से चित्रित किया गया है। एक गांव जहां के ग्रामीण बड़े प्रेमभाव और आपसी भाईचारा से रहते हैं। पर एक हादसे से पूरे गांववालों में उथल-पुथल मच जाती है और वे कोर्ट-कचहरी के चक्कर में फंसते चले जाते हैं। फिर अंतत: हर फिल्म की भांति इस फिल्म की भी हैप्पी इंडिंग होती है।

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फिल्म का डायरेक्शन :-


फिल्म में मनोज वर्मा जी का डायरेक्शन बेहतरीन है। इस फिल्म के हर सीन और हर कलाकार परदे पर जीवंत नजर आते हैं, यह एक सुलझे हुए और अनुभवी डायरेक्टर की पहचान है। पूरे फिल्म के दौरान कहीं भी ऐसा नहीं लगा कि फिल्म पटरी पर से उतर रही है। फिल्म की शुरूआत में ही जिस तरह भूलन कांदा पर ध्यान केंद्रित किया गया है, उसकी छाप दर्शकों पर जरूर रहेगी।


हर रोल दमदार, हर अदाकारी शानदार:-


फिल्म में हर कलाकार ने अपने रोल के साथ न्याय किया है। भकला के रोल में ओंकार दास मानिकपुरी ने तो गंजहा के किरदार में सलीम अंसारी ने कमाल ही कर दिया। इसके साथ ही एक आदमी के लिए पूरा गांव एकजुट होता है, वो दृश्य काफी अद्भुत है। इसके साथ ही सरपंच के रोल में आशीष सेंद्रे, इंस्पेक्टर के रोल में पुष्पेन्द्र सिंह ने बेहतरीन अदाकारी दिखाई है।


फिल्म समीक्षा : भूलन द मेज :कॉमेडी


कॉमेडियन संजय महानंद ने कोटवार की भूमिका निभाई है। जिस अंदाज में वो परदे पर दिखते हैं; वैसे ही दर्शकों की हंसी छूट जाती है। फिल्म के एक सीन में जब मोबाइल नेटवर्क नहीं आ रहा होता है, तब सीढ़ी पर चढ़कर बात करते की कोशिश को बड़े की अच्छे ढंग से प्रस्तुत किया गया है, जो आपको हंसने पर मजबूर कर ही देगा।

गाने और संगीत:-

फिल्म के गाने और संगीत कर्णप्रिय हैं।
खासकर, गाने सुनकर आपको ऐसा लगेगा कि ये मुझसे ही जुड़ा हुआ है।
टाइटल सांग की बात करें तो इसका लेखन प्रवीण और मनोज वर्मा ने लिखा है।
जिसे बॉलवुड के सुप्रसिध्द गायक कैलाश खेर ने गाया है।
वहीं फिल्म का बहुत ही खूबसूरत गीत नंदा जाही कारे…को मीर अली मीर ने लिखा है।
फिल्म में संगीत सुनील सोनी ने दिया, जो की रूटीन से हटकर है।

फिल्म समीक्षा : भूलन द मेज

अंत में,
फिल्म भूलन द मेज बहुत ही खास फिल्म है। वाकई जब आप फिल्म को देखेंगे तो तारीफ जरूर करेंगे।
इसका हर सीन अपने आप में बेहतरीन है।
गांव का सीन तो बहुत ही नेचुरल, जो आपको पसंद आएगा।

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