मोर छईयां भुईयां फिल्म का गीत आज के दौर में सार्थक हो रहा : सतीश जैन

छत्तीसगढ़ी फिल्म निर्देशक सतीश जैन जी से खास चर्चा फिल्म हंस झन पगली फंस जबे की 1 साल पूर्ण होने पर

CGFilm – छत्तीसगढ़ की बहुचर्चित फिल्म मोर छईयां भुईयां फिल्म का गीत… छइयां भुइयां ला छोड़ जवैय्या तैं…की सार्थकता आज साबित हो रही है, ये कहना है निर्माता और निर्देशक सतीश जैन का। cgfilm.in से चर्चा करते हुए सतीश जैन ने कहा कि मोर छईयां भुईयां फिल्म का ये गीत आज के दौर यानी कोरोना काल में सार्थक साबित हो रहा है। उन्होंने कहा कि आज छत्तीसगढ़ से बाहर कमाने-खाने गए लाखों श्रमिक अपने गृहग्राम लौट रहे हैं। मोर छईयां भुईया फिल्म में इन्हीं सब बातों को दिखाया गया था। जो आज सच साबित हो रहा है। सतीश जैन ने कहा कि गाने के एक-एकशब्द छत्तीसगढ़ छोड़कर जाने वालों के लिए एक बड़ा संदेश देता है।
आप भी देखिए मोर छईयां भुईया गीत के बोल…

छइयां भुइयां ला छोड़ जवैय्या तैं
थिराबे कहाँ रे
छइयां भुइयां ला छोड़ जवैय्या तैं
थिराबे कहाँ रे

पँछी उड़ा थे आगाश
करथे बिरछा मा बास
धरती मा आये बिना दानापानी
पाबे कहाँ रे
तैं थिराबे कहाँ रे
छइयां भुइयां ला छोड़ जवैय्या तैं
थिराबे कहाँ रे

धुर्रा धुआं मा नहाबे
जिनगी ला बिरथा गवाबे
धरती माता के सेवा बिन
सुख पाबे कहाँ रे
तें थिराबे कहाँ रे
छइयां भुइयां ला छोड़ जवैय्या तैं
थिराबे कहाँ रे

कतका जोरे का गवाएं
पीढ़ी पीढ़ी भरमाये
धरती के मान गुन बढ़ेया
मुकति पाबे इहाँ रे
तें फिर आबे इहाँ रे

छइयां भुइयां ला छोड़ जवैय्या तैं
फिर आबे इहाँ रे
छइयां भुइयां ला छोड़ जवैय्या तैं
फिर आबे इहाँ रे
छइयां भुइयां ला छोड़ जबया तैं
फिर आबे इहाँ रे

WhatsApp chat