भूपेश की एंट्री, सोनाली की अदा और प्रकाश की चमक से रौशन मया होगे रे…

फिल्म समीक्षा: एकान्त

CGFilm.in (एकान्त)। आज रिलीज हुई छत्तीसगढ़ी फिल्म मया होगे रे…में अगर कुछ पहलुओं को छोड़ दिया जाए तो फिल्म हर मामले में अव्वल दर्जे की है। फिल्म में एक ओर जहां डेब्यू कर रहे भूपेश चौहान ने अपने अभिनय से दर्शकों का दिल जीता है, वहीं छॉलीवुड एक्ट्रेस सोनाली सहारे को दर्शक हर सीन में अलग-अलग रूप में देखेंगे, यानी उनका रोल काफी चैलेजिंग कह सकते हैं। खासकर, तब जब फिल्म में दो हीरो हों तो हीरोईन का किरदार अपने आप में चैलेजिंग होता है। फिल्म का सबसे शानदार और खूबसूरत पहलू हैं-छॉलीवुड के सुपरस्टार प्रकाश अवस्थी। इस फिल्म में सचमुच उनका किरदार प्रकाश में चमक जैसा है। उनकी एंट्री से दर्शक रोमांचित तो हुए ही…वहीं फिल्म देखकर निकल रहे कई दर्शकों ने प्रकाश अवस्थी के रोल की जमकर तारीफ की। एक तरह से अगर देखा जाए तो इस फिल्म में ऐसे ही किसी किरदार की जरूरत थी, जो फिल्म की गति को संतुलित कर सके।  बात अगर मया होगे रे… की हो तो फिल्म में कुछ दृश्यों को छोटा भी किया जा सकता है, लंबे खींचे दृश्य दर्शकों को बोझिल कर रहे थे। फिल्म का कॉमेडी पक्ष को भी थोड़ा और विस्तारित करना था, क्योंकि एक फिल्म में ये सब हो तो दर्शको को कुर्सी से चिपकाने के लिए मजबूर करते हैं।

कहानी
फिल्म की कहानी लव ट्रांयगल पर टिकी हुई है- PRV यानी प्रियंका (सोनाली सहारे), राहुल (भूपेश चौहान) और विशाल (प्रकाश अवस्थी) । एक तरफ जहां राहुल प्रियंका के साथ ही कॉलेज में पढ़ता है, वहीं विशाल कॉलेज का पूर्व छात्र रह चुका है। कॉलेज में ही राहुल और प्रियंका का रोमांस परवान चढ़ता है, जो फिल्म के इंटरवेल तक टिका रहता है। फिर शुरू होता इंटरवेल के बाद का सीन, जिसमें राहुल को एक झन्नाटेदार सरप्राइज मिलता है और फिल्म के सारे सीन ही बदल जाते हैं। ये सरप्राइज क्या है? ये जानने आपको अपने नजदीकी सिनेमाघरों का रुख अवश्य करना होगा।

डायरेक्शन
फिल्म का डायरेक्शन वैसे तो काफी बढिय़ा रहा है। पर दर्शकों को जरुर एक-दो सीन को लेकर शिकायत रही है। फिल्म में जब  कॉलेज के एनुवल फंक्शन की घोषणा होती है और रियर्सल के दौरान विक्रम का नदारद रहना  दर्शकों को कुछ जंचा नहीं, फिर अचानक ही वो रियर्सल के एक सीन में नजर आया। वहीं दूसरी ओर शादी से भरे माहौल में चुपचाप तरीके से हीरोईन को विलेन का ले जाना ये बात भी जमी नहीं। बाकी ट्रैक पर दौड़ती फिल्म काफी अच्छी है।

गाने और संगीत
फिल्म के गाने काफी अच्छे और कर्णप्रिय हैं। खासकर टाईटल सांग को दर्शकों ने खूब इंजॉय किया। संगीत की बात करें तो फिल्म में संगीत बहुत ही अच्छा है। कुछ जगह जरूर ऐसा लगा, जैसा वहां शोर शराबा कुछ कम किया जा सकता था।

अंत में,
मया होगे रे… फिल्म दर्शकों को जरूर पसंद आएगी, क्योंकि इसमें लव, एक्शन और पारिवारिक ड्रामा का जबरदस्त कॉम्बीनेशन है। डेब्यू हीरो भूपेन्द्र ने अपने रोल में ढलने का काफी अच्छा प्रयास किया है, ये फिल्म देखकर आप भी कहेंगे। सोनाली सोहारे ने जिस अंदाज में फाइट सीन किया है, ये काफी चैलेंजिग रहा होगा। और प्रकाश अवस्थी अपनी चमक से चमकते ही रहते हैं। उनकी इस फिल्म में एंट्री ठीक उसी वक्त हुई, जब दर्शक दीर्घा में बैठे एक शख्स ने पूछा था- प्रकाश भैया आ गए क्या…? फिल्म में एक गाने को लेकर दर्शकों की नाराजगी रही है जिसमें परदे पर हीरो नजर आया, लेकिन गाने के बोल होराईन के थे। साथ ही एक बात और, हीरो की असली हीरोगीरी तभी निकलकर सामने आती है, जब विलेन मजबूत हो और इस फिल्म में विलेन के किरदार में आपको वो दम भी दिखेगा। कुल मिलाकर यदि आप छत्तीसगढ़ी फिल्मों के शौकीन हैं और अपने चहेते कलाकारों को देखना चाहते हैं तो ये फिल्म एक बार जरूर देखें, क्योंकि ये फिल्म पैसा वसूल फिल्म है।