छत्तीसगढ़ी फिल्मों का सफर-2

छत्तीसगढ़ी फिल्मों का सफर-2

CGFilm.in जैसा कि आप सब जानते हैं छत्तीसगढ़ी फिल्मों का सफर 1965 में आई मनु नायक की कहि देबे संदेश के साथ ही शुरू हुआ है। कहि देबे संदेश ने एक संदेश के साथ-साथ छत्तीसगढ़ की क्षेत्रीय भाषा को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने में काफी मदद की। और कहि देबे संदेश-2 बनाने की घोषणा भी मनु नायक के मार्गदर्शन में जोहार छत्तीसगढ़ के निर्माता और निर्देशक देवेन्द्र जांगड़े ने की है।
कहि देबे संदेश के साथ ही 1965 में स्व.विजय कुमार पाण्डेय ने छत्तीसगढ़ के टूटते परिवार की कहानी को लेकर फिल्म ‘घर द्वार’ बनाने का संकल्प लिया था। इस फिल्म ने भी सफलता के कई आयाम तय किए हैं और इसके गीत आज भी काफी कर्णप्रिय हैं। रायपुर भनपुरी निवासी स्व. विजय कुमार पांडेय ‘घर द्वार’ के निर्माता थे। इस फिल्म के लेखक और निर्देशक निरंजन तिवारी थे। संगीत जमाल सेन और गीत हरि ठाकुर के हैं।

घर द्वार‘ छत्तीसगढ़ी की दूसरी फिल्म थी, जो 1971 में रिलीज हुई। इस फिल्म में दुलारी बाई, कान मोहन, रंजीता ठाकुर, गीता कौशल, जफर अली फरिश्ता, शिवकुमार दीपक, इकबाल अहमद रिजवी, स्व. बसंत दीवान और नीलू मेघ ने प्रमुख भूमिकाएं निभाई थी।
इस फिल्म के गाने ‘गोंदा फूल गे मोर राजा और ‘सुन-सुन मोर मया पीरा के’ को मोहम्मद जाकिर हुसैन, मोहम्मद रफी ने स्वर दिया था। आकाशवाणी से भी इसके गीत खूब बजे। 1965 में आई कहि देबे संदेश और 1971 में रिलीज हुई घर द्वार के बाद छत्तीसगढ़ी फिल्मों के निर्माण में एक लंबा ब्रेक लग गया था। लेकिन इसकी रफ्तार सन् 2000 में छत्तीसगढ़ राज्य गठन के साथ ही तेज हुई। फिर जो सिलसिला चल पड़ा, उसका क्या कहना। एक के बाद एक लगातार हिट और सुपरहिट फिल्मों का वो दौर चला, जो आज तक अनवरत जारी है। छत्तीसगढ़ी फिल्मों को सफर आज 56 साल से लगातार जारी है। धीरे-धीरे वीडियो सांग, शार्ट फिल्में और अब वेबसीरिज की ओर भी निर्माता-निर्देशक लगातार अपने कदम बढ़ा रहे हैं। (क्रमश:)

छत्तीसगढ़ी फिल्मों का सफर-2