न्यूटन की शूटिंग के लिए 40 दिन तक रोज होता था मेरा मुंडन : जयेश

छत्तीसगढ़ी, हिन्दी और तेलुगू फिल्मों के कलाकार जयेश कामवरपू ने की cgfilm.in से की विशेष चर्चा

एकान्त चौहान
हर कलाकार की तमन्ना होती है कि वो हर किरदार में फिट रहे। हर प्रकार का रोल करें और खासकर चैलेंजिंग रोल तो हर कलाकार निभाना चाहता है। क्योंकि एक ही किरदार में लगातार काम करते रहने से कलाकार अपने को बंधा सा महसूस करते हैं। इसलिए वो हर प्रकार का रोल निभाना चाहते हैं। cgfilm.in से एक ऐसे ही कलाकार जयेश कामवरपू ने विशेष बातचीत की तो उनके तीन भाषाओं और क्षेत्रों की फिल्म में काम करने का अदुभुत अनुभव सामने आया। वैसे आपको बता दें कि जयेश ने छत्तीसगढ़ी, हिन्दी और तेलुगू भाषाओं की फिल्मों में काम किया है। वे अभिनय के क्षेत्र में लगातार आगे बढऩे की आकांक्षा रखते हैं। उनकी हाल ही में नेटफ्लिक्स पर चमन बहार फिल्म रिलीज हुई है। इसमें हालांकि उनका रोल छोटा रहा, लेकिन काफी अच्छा था। इससे पहले वे दो छत्तीसगढ़ी फिल्मों अमित प्रधान की राम बनाही जोड़ी और गौरीशंकर दास के मया के घरौंदा में भी बतौर लीड रोल नजर आ चुके हैं। इसके अलावा कई तेलुगू फिल्मों में भी उन्होंने काम किया है। हिन्दी फिल्म न्यूटन में भी उन्होंने अभिनय किया है। और न्यूटन की शूटिंग के लिए 40 दिन तक रोज होता था मेरा मुंडन… तो आइए जानते हैं जयेश कामवरपू से उनकी फिल्मों के सफर में-

cgfilm.inजयेश जी, सबसे पहले आपकी आने वाली फिल्मों के बारे में कुछ बताइए?
जयेश– जी, मैं अभी एक तेलुगू फिल्म की तैयारी कर रहा हूं। जिसमें एक अच्छा पुलिस ऑफिसर का रोल है। इस फिल्म में पांच लोगों की कहानी है। बहुत जल्द ये बनने की तैयारी में है। और एक छत्तीसगढ़ी फिल्म भी, जिसका बहुत जल्द आपको भी पता चल जाएगा।

cgfilm.inजयेश जी, आप तीन भाषाओं की फिल्मों काम करते हैं, छत्तीसगढ़ी, हिन्दी और तेलुगू, तो शूटिंग के दौरान भाषा की दिक्कतें आपको आती है?
जयेश– जी, आपको बताऊं कि इन तीन भाषाओं में काम करने का मेरा एक अलग ही अनुभव और खुशी है। मैं अपने आपको लकी मानता हूं कि मुझे हर लग्वेज में काम करने का मौका मिल रहा है। मैं हूं तो साउथ इंडियन, लेकिन मेरा जन्म रायपुर में हुआ है। इसलिए तेलुगू से जुड़ाव में बचपन से रहा है। फैमिली बैकग्राउंड भी मेरा यही है। रही बात छत्तीसगढ़ी की, तो पैदाइश यहीं की है। मेरा लालन-पालन सब छत्तीसगढ़ में ही हुआ, तो मैं इस महतारी का भी बच्चा हूं। और हिन्दी राष्ट्रभाषा के तो हम सब बच्चे हैं। मैं अपने आपको लकी मानता हूं कि मुझे इन तीन भाषाओं में काम करने का अवसर मिला है। इसके लिए मैं भगवान का भी शुक्रगुजार हूं कि मुझे इन तीन भाषाओं में काम करने का अवसर मिला और आगे भी मिलता रहे।

cgfilm.inअभी आने वाली फिल्म?
जयेश– जी, हिन्दी में तो अभी हाल ही में मेरी चमन बहार फिल्म आई थी। फिल्म में रोल छोटा सा था, लेकिन काफी अच्छा रहा, यादगार रोल रहा। इससे पहले मैंने हिन्दी फिल्म न्यूटन में काम किया था। अभी हिन्दी में भी कुछ फिल्म है, जिसे आने पर बताया जाएगा। छत्तीसगढ़ी और तेलुगू में भी है। तेलुगू में जैसा कि अभी आपको बताया और बहुत जल्द छत्तीसगढ़ी फिल्म के बारे में भी आपको पता चल जाएगा।

cgfilm.inएक्टिंग के प्रति आपको रुझान बचपन से था या…?
जयेश– जी, एक्टिंग के प्रति मेरा रुझान बचपन से ही था। बहुत छोटी सी उम्र में ही मैं क्लीयर था कि मैं फिल्मों के लिए ही बना हूं। फिल्में देखना मुझे ज्यादा पसंद थी। तो फिल्में देखते-देखते मुझे लगा कि मुझे करना भी है। इसलिए चाहे स्कूल हो, कॉलेज हो, मैं डांस और एक्टिंग की गतिविधियों में कभी पीछे नहीं रहता था। जैसे ही स्कूल की पढा़ई पूरी हुई और ग्रेजुएशन करते-करते मुझे समझ आ गया कि मुझे फिल्म मेकिंग में ही जाना है आगे। और आगे जाकर मैं फिल्म मेकिंग में जुड़ा और यहीं से मेरा सफर शुरू हुआ।

cgfilm.inआपने पहली बार कैमरा कब फेस किया?
जयेश– देखिए, 2007 में जब मैंने फिल्म मेकिंग इंस्टीट्यूट में ज्वाइन किया था, तब मैंने पहली बार कैमरे का सामना किया था। उस समय छोटे कैमरे से शूटिंग किया जाता था। उसके बाद मैंने हैदराबाद में करीब 100 से 150 फिल्मों में जूनियर आर्टिस्ट बतौर काम करने के बाद राना दग्गुबाटी के साथ प्रापर कैमरे फेस करने का मौका मिला, राना दग्गुबाटी, जिन्होंने बाहुबली-2 में विलेन का किरदार निभाया है। बहुत छोटा सा रोल था मेरा, लेकिन मुझे खुशी है कि मैंने उनके साथ काम किया। उसके बाद मेरा फिल्म लाइन में सफर शुरू हुआ।

cgfilm.inअपने एजुकेशन के बारे में कुछ बताइए?
जयेश– एजुकेशन मेरा पूरा रायपुर में हुआ। मैं रायपुर से पढ़ा-लिखा हूं। रायपुर के होलीक्रॉस बैरनबाजार से मैंने अपनी स्कूली पढ़ाई पूरी की। उसके बाद मैंने बी-कॉम की पढ़ाई यहीं पं. रविशंकर शुक्ल यूनिवर्सिटी से पूरी की है। फिल्म इंस्टीट्यूट हैदराबाद से मैंने फिल्म मेकिंग और डायरेक्शन का कोर्स किया और मुंबई से भी मैंने फिल्म मेकिंग का कोर्स किया है। ताकि फिल्म की बारीकियां सीख सकूं। वास्तव में मैंने एक्टर ही बनना चाहता था, लेकिम मैंने डायरेक्शन की बारीकियां भी सीखी। डायरेक्शन में अपना एक अलग ही मजा है तो मैं हैदराबाद में अस्सिटेंट डायरेक्टर भी रहा, अस्सिटेंट डीओपी भी रहा। मैं एक्टर भी हूं और डायरेक्टर भी हूं। ये बहुत अच्छा लगता है कि मैं हर सेक्टर में काम करता हूं और फिल्म को पूरी तरह जी रहा हूं।

cgfilm.inजयेश जी, फिल्मों के लिए आपने अपने लुक में भी परिवर्तन किया है?
जयेश– मुझे एक कलाकार के बतौर ये अच्छा लगता है कि मुझे अपना लुक चेंज करने का मौका मिलता है। बतौर एक्टर राम बनाही जोड़ी में मैं एक लवर व्बॉय था। उसके जब मैं साउथ की फिल्म करने गया तो वहां थोड़ा हेल्थी लड़के का रोल मिला। फिर उसके बाद हिन्दी फिल्म किया न्यूटन, जिसके लिए मुझमें बहुत परिवर्तन किया गया। न्यूटन फिल्म की कहानी एक दिन की थी, 40 दिन की शूटिंग थी, लेकिन न्यूटन की शूटिंग के दौरान तो 40 दिनों तक रोज मेरा मुंडन होता था। वेट बढ़ाया था। मुझे कहा गया है कि आप फिल्म में इसी गेटअप में रहेंगे, कुछ अलग दिखेंगे। वो काफी अच्छा रहा। फिर मैंने एक फिल्म करने का प्रयास किया, जिसमें मैंने बाल काफी रखे हैं, लेकिन यह फिल्म अभी कुछ कारणवश रूक गई है। लेकिन मैंने इसी गेटअप में एक एलबम किया- तोर दीवाना होगेंव रे… जिसे लोगों ने काफी पसंद किया। और अब मैंने एक वीडियो सांग तू ही मा परान के लिए हेयर कट किया है।