विश्व रंगमंच के दिवस के अवसर पर आंखों से अभिनय करने में माहिर संदीप पाटिल ने लिखी एक शानदार कविता… आप भी देखिए…

CGFilm (एकान्त चौहान)। विश्व रंगमंच – आंखों से अभिनय करने में माहिर संदीप पाटिल को आपने छत्तीसगढ़ी फिल्म दईहान (द काउमैन) में देखा है। इसके साथ ही संदीप पाटिल ने रंगमंच, कई गाने और शार्ट मूवी के साथ ही टीवी सीरियल में भी लगातार काम किया है। हाल ही में आई उनकी शार्ट मूवी मंडे मार्निंग.. दिल को छू जाने वाली है। 10 मिनट की इस मूवी में संदीप ने कमाल का अभिनय किया है। संदीप ने एक वेब सीरीज की जिसमें वो विलेन हैं। एंड टीवी पर एक और सीरियल मौका-ए-वारदात पर भी संदीप पाटिल ने किरदार निभाया है, जो पिछले हफ्ते ही प्रसारित हुआ।

इसके अलावा संदीप ने दूरदर्शन मध्यप्रदेश के कई सीरियल जैसे सपने सुहाने, गांव हमारा शहर से प्यारा आदि में काम किया है। इसके अलावा लाईफ ओके में आने वाला सावधान इंडिया, सोनी टीवी के क्राइम पेट्रोल, डीडी-वन के महात्मा ज्योतिबा फुले, एंड टीवी के लाल इश्क के साथ ही अंजान टीवी के सीरियल संघर्ष देवकी का में विलेन सूरजप्रताप सिंह की भूमिका अदा की, जिसे सबने सराहा।

आपको बता दें कि संदीप 15 साल से ही थिएटर यानी रंगमंच के क्षेत्र में सक्रिय हैं। 9वीं कक्षा से निर्देशक सरफराज हसनजी के साथ थिएटर की शुरुवात की थी। इसके अलावा वे थिएटर क्षेत्र में बेस्ट निर्देशक, बेस्ट एक्टर एवं रंग युवायन सम्मान से भी नवाजे गए हैं।

संदीप पाटिल ने आज विश्व रंगमंच दिवस (27 मार्च) के अवसर पर एक कविता लिखी है, जो उनके इंस्टाग्राम पर है। आप भी देखिए…

मैं रंगमन्च का खिलाड़ी हूँ
उसके बिना यारोंं अनारी हूँ

भागता हूँ उसपर मैं सरपट
उसके बिना सब है काला वृत

मित्र है मेरा संगीत
इसके द्वारा बन जाते है कई मीत

प्रकाश परिकल्पना से आता है मुझमें निखार
वो ना हो तो मन्च पर सब बेकार

नाटक के कपड़ो से आती है ख़ूबसूरती
सभी की आँखे उस पर जो है टिकती

किरदार की आत्मा में जीने की है मुझे लत
ना जी पाओ तो समझो सब है काला वृत

नृत्य में मेरे बजना चहिए ताली
अरे भाई किसे खानी है निर्देशक की गाली

मैं रंगमन्च का खिलाड़ी हूँ
उसके बिना यारोंं अनारी हूँ