छत्तीसगढ़ी फिल्मों का सफर-4

मोर छंईया-भुईयां के बाद छत्तीसगढ़ी फिल्मों को मिली गति


एकान्त चौहान (CGFilm.in)। जैसा कि आप सब जानते हैं कि छत्तीसगढ़ी फिल्मों का सफर वैसे तो 1965 में आई कहि देबे संदेश के साथ ही शुरू हो चुका था। इसके बाद 1971 में घर द्वार रिलीज हुई। इन दोनों ही फिल्मों के बाद छत्तीसगढ़ी फिल्मों के सफर में एक लंबा बे्रक लग गया था। लेकिन राज्य गठन के साथ ही छत्तीसगढ़ी फिल्मों के निर्माण में जबरदस्त तेजी आई और आज हजारों छत्तीसगढ़ी फिल्मों का निर्माण हो चुका है। इसके साथ ही यू-ट्यूब पर छत्तीसगढ़ी एलबम, वीडियो सांग, शार्ट मूवी और अब वेबसीरिज में भी अपना कमाल दिखा रही है।


वैसा देखा जाए तो मोर छंईया-भुईयां के बाद छत्तीसगढ़ी फिल्मों के निर्माण में काफी गति आई। निर्माता, निर्देशकों और फिल्मों में काम करने के इच्छुक कलाकारों को भी एक नई प्रेरणा मिली। क्योंकि छत्तीसगढ़ को अब अलग राज्य का दर्जा मिल चुका था और मोर छंईया-भुईयां ने रिकॉडतोड़ भीड़ जुटाई थी। लिहाजा धीरे-धीरे बड़ी तेजी के साथ फिल्मों का निर्माण होने लगा।


मोर छंईया-भुईयां के बाद आई फिल्में मयारू भौजी, मया दे दे मया ले ले, झन भूलव मां-बाप ला और मया, परदेसी के मया, तोर मया के मारे, टूरा रिक्शा वाला और लैला टिप टाप छैला अंगूठा छाप, रघुबीर, तीजा के लुगरा, भांवर, मया दे दे मयारू, महूं दीवाना तहूं दीवानी और राजा छत्तीसगढिय़ा, बीए फस्र्ट ईयर, बीए सेकेंड ईयर, हंस झन पगली जैसी सैकड़ों फिल्में आई। आपको बता दें कि इनमें से कई फिल्मों ने तो 100 दिनों तक लगातार प्रदर्शित होने का रिकॉर्ड भी बनाया है।

सन 2000 के बाद से छत्तीसगढ़ी फिल्मों के निर्माण में जो तेजी आई, वो अनवरत जारी है। इस दौरान इतना अवश्य है कि यू-ट्यूब के साथ ही कई निर्माता और निर्देशकों ने अपने वीडियो सांग और एलबम भी लांच किए, जिसे दर्शकों ने खूब पसंद किया। धीरे-धीरे आगे बढ़ रही छत्तीसगढ़ी फिल्मों के निर्माण ने भी अब विस्तृत रूप लेना शुरू कर दिया है। आज यू-ट्यूब पर छत्तीसगढ़ी में वेबसीरिज, वीडियो सांग और कई शार्ट मूवी के साथ ही कॉमेडी मूवी भी मौजूद हैं, जिसे दर्शकों का जबरदस्त रिस्पांस मिल रहा है।

कुल मिलाकर देखा जाए तो आने वाले समय में छत्तीसगढ़ी फिल्मों के निर्माण में और तेजी आने की उम्मीद है। पहले युवा भी छत्तीसगढ़ी फिल्मों में काम करने में उतनी उत्सुकता नहीं दिखाते थे, जितना अब दिखाने लगे हैं। लिहाजा स्थानीय युवा भी छत्तीसगढ़ी फिल्मों में अपना कैरियर देख रहे हैं और वे फिल्म और शार्ट मूवी के जरिए अपनी अदाकारी दर्शकों तक पहुंचा रहे हैं। (क्रमश:)