हीरो बनने की तड़प मुझमें बचपन से ही थी : देवेन्द्र साहू (अभिनेता)

छत्तीसगढ़ी फिल्म सुन सुन मया के धुन… के अभिनेता से cgfilm.in की बातचीत

फिल्म लाईन में आने का सारा श्रेय मेरी मां को जाता है

CGFilm (एकान्त चौहान)। शुद्ध पारिवारिक और कॉमेडी से भरपूर फिल्म सुन सुन मया के धुन 30 अप्रैल के जगह अब 23 अप्रैल को आपके नजदीकी सिनेमाघरों में प्रदर्शित होने वाली है। इस फिल्म में अपनी अदाकारी का जलवा बिखेरने वाली देवेन्द्र साहू से cgfilm.in ने लंबी बातचीत की। देवेन्द्र साहू ने अपने फिल्मी कैरियर को और फिल्म को लेकर कई दिलचस्प बातें की। प्रस्तुत है बातचीत के कुछ अंश-

एकान्त चौहान : देवेन्द्र जी, सबसे पहले अपने फिल्मी कैरियर के बारे में कुछ बताइए?
देवेन्द्र साहू : जय जोहार, जय छत्तीसगढ़ संगवारी हो! मंै हौं आप मन के देवेन्द्र साहू (खलिहान फेम) राजनांदगांव (छ ग)। मेरा फिल्मी कैरियर अपने बचपन से जब मैं दस साल का था, तब से मुझे फिल्मों में काम करने का ललक था मैं जब कभी भी अपने घर में टीवी में फिल्म देखता था तब से मुझे हीरो बनने की तड़प थी और मेरी फिल्मी दुनिया की सच्ची जिंदगी 2004 से शुरू हुई। फिल्म लाइन में आने का श्रेय मिला मैं अपनी मां को देता हूं। इसमें मेरी मां का सबसे महत्त्वपूर्ण योगदान और उसका आशीर्वाद रहा।

एकान्त चौहान : फिल्म सुन सुन मया के धुन के बारे में आपका क्या कहना है?
देवेन्द्र साहू : इस फिल्म की खासियत यह है कि यह एक ऐसा फिल्म है कि आज तक ऐसा सबजेक्ट को शायद मैंने अभी तक न देखा है और ना ही सुना है। बहुत ही साफ सुथरी और पारिवारिक फिल्म है। ये फिल्म दर्शकों को बहुत ही मन से भाएगी और उनका भरपूर मनोरंजन भी करेगी, ऐसा मेरा मानना है!

एकान्त चौहान : फिल्म में अपने किरदार के बारे में बताइए?
देवेन्द्र साहू : फिल्म सुन सुन मया के धुन में मैंने लीड हीरो का किरदार निभाया हूं। मेरे लिए मेरा किरदार चैलेंजिंग था और मैं इस फिल्म में मन से रोल अदा भी किया हूं। इस फिल्म में मेरा जो रोल है, वह दर्शकों को पसंद आयेगा क्योंकि इसमें मैं दिल से डायरेक्टर के कहने पर काम किया हूं और अपनापन भी रोल में डाला हूं।

एकान्त चौहान : इस किरदार के लिए आप ने कोई विशेष तैयारी की है?
देवेन्द्र साहू : जी, इस किरदार के लिए मैंने बहुत कुछ तैयारी की, जैसे कि अपने आपको मेंटेनेंस किया। इसके साथ ही डायेक्टर ज्ञानेश हरदेलजी ने मुझे संवारने के लिए बहुत मेहनत की और मुझसे भी मेहनत करवाया और किया हूं जो आप लोगों को परदे पर दिखेगा और आप लोगों को बहुत पसंद आयेगा।

एकान्त चौहान : फिल्म को लेकर कितना उत्साहित हंै?
देवेन्द्र साहू : मैं फिल्म को लेकर बहुत उत्साहित हूं। ऐसा लग रहा है कि कब इस फिल्म को परदे पर देखंू ताकि जो इस फिल्म में मैंने मेहनत की हूं कितना पब्लिक को पसंद आयेगा और कहे- देवेन्द्र साहू आपने बहुत अच्छे ढंग से रोल किया है, इसके लिए आपको बहुत बहुत बधाई।

एकान्त चौहान : फिल्म लाइन से पहले आप क्या करते थे?
देवेन्द्र साहू : मैं फिल्म लाइन से पहले बिजनेस करता था और अब भी करता हूं। इसी बीच अपने जीवन में फिल्मी कैरियर को भी जोड़ लिया हूं, जब तक मेरी सांस में सांस है तब तक मैं फिल्मी दुनिया में काम करता रहूंगा और मुझे जो भी चैलेंजिंग रोल मिलेगा चाहे वो छोटा हो या बड़ा हर तरह का रोल करूंगा।

एकान्त चौहान : क्या आपको लगता है कि ओटीटी प्लेटफार्म अब इंटरटेनमेंट का भविष्य होगा?
देवेन्द्र साहू : जरूर होगा। क्योंकि अब बहुत से सिनेमा घर बंद हो रहे हैं। फिर भी लोग फिल्म देख रहे हैं चाहे वो ओटीटी प्लेटफार्म या परदा सिनेमा घर में हो। देखने वाले अपने इंटरटेनमेंट के लिए फिल्म देखेंगे। पब्लिक का पसंद इंटरटेनमेंट का होना उनसे ही अपना भविष्य इंटरटेनमेंट के लिए खुद का चुन लेगा।

एकान्त चौहान : शूटिंग के दौरान कैसा लगा?
देवेन्द्र साहू : मुझे हर फिल्म शूटिंग के दौरान बहुत ही अच्छा लगता है। शूट के दौरान उतार-चढ़ाव बहुत आता है, पर कलाकारों को निर्माता और डायरेक्टर के बारे में सोचते हुए काम करना चाहिए क्योंकि फिल्म पैसे से बनता है। निर्माता बड़े मुश्किल से फिल्मों में पैसा लगाते हैं तो हम कलाकारों को ध्यान रखते हुए निर्माता के बारे में सोचना चाहिए और इस फिल्म सुन सुन मया के धुन शूटिंग के दौरान मुझे अच्छा सपोर्ट मिला जिसमें मेरी हीरोइन मोनिका शर्माजी के साथ काम करने में मुझे बहुत अच्छा लगा।

एकान्त चौहान : अपने सहयोगी कलाकारों खासकर फिल्म के हीरो ज्ञानेश हरदेल जी के साथ काम करने का आपका अनुभव कैसा रहा?
देवेन्द्र साहू : पूरे टीम में जितने भी कलाकारों ने काम किया जैसे कि निर्माता, डायरेक्टर, कैमरामैन, आर्ट वाले, कॉस्ट्यूम वाले, मेकअप मैन और सबसे बड़े महत्वपूर्ण योगदान स्पोटबॉय जिसके बिना कोई फिल्म नहीं बनती, सबके साथ काम करने में बड़ा मजा आया। अहम भूमिका प्रोडक्शन मैनेजर अनिल अग्रवाल , शिवम् साहू का योगदान रहा। फिल्म लाइन में लाने वाला ज्ञानेश हरदेेल जी को मैंने याने कि देवेन्द्र साहू के कहने पर फिल्म में प्रोड्यूस किया और मेरे साथ में दोस्त का रोल भी निभाया। असिस्टेंट डायरेक्टर सतीश देवांगन और सभी कलाकारों के साथ काम करने में मजा आया। मैं पूरे टीम को धन्यवाद देता हूं और महान कलाकार रजनीश झांझी के साथ काम करने का मुझे सौभाग्य प्राप्त हुआ।

एकान्त चौहान : बॉलीवुड में आपके फेवरेट हीरो और हीरोइन?
देवेन्द्र साहू : बॉलीवुड में मेरे फेवरेट हीरो मिथुन चक्रवर्ती और हीरोइन श्रीदेवी ये दोनों रहे हैं।

एकान्त चौहान : दर्शकों से कुछ कहना चाहेंगे?
देवेन्द्र साहू : दर्शक के बिना कोई भी कलाकार अधूरा ही रहता है। फिल्म चाहे हमारी भाषा में हो या हिंदी में हो या भोजपुरी में हो या कोई भी भाषा में हो लेकिन जब छत्तीसगढ़ी भाषा में बनती हैं फिल्म तो लोगों की कतार बढ़ जाती हैं क्योंकि छत्तीसगढिय़ा सबले बढिय़ा। पब्लिक का उत्साहवर्धन हम कलाकारों की शान है। मै दर्शकों से इतना कहना चाहूंगा कि वो हमारी भाषा के फिल्म को प्यार दें… आशीर्वाद दें…।

एकान्त चौहान : छत्तीसगढ़ी फिल्मों का भविष्य आपकी नजऱ में?
देवेन्द्र साहू : छत्तीसगढ़ी फिल्मों को जब तक दर्शक देखेंगे नहीं, तब तक छत्तीसगढ़ी फिल्मों का भविष्य कैसे बढ़ेगा। इसलिए मेरी दर्शकों से गुजारिश है कि वो छत्तीसगढ़ी फिल्मों का आनंद लें। वहीं मेरी नजर में छत्तीसगढ़ी फिल्मों का भविष्य काफी उज्जवल है। अभी लगातार नित नए फिल्में आ रही हैं, जिसे दर्शकों का रिस्पांस भी भरपूर मिल रहा है। इसके साथ ही मुझे पूरी उम्मीद है कि हमारी फिल्म सुन सुन मया के धुन भी दर्शकों को खूब पसंद आएगी।

एकान्त चौहान : क्या आपको भी लगता हैं कि छत्तीसगढ़ी फिल्मों को दर्शक नहीं मिल पाते?
देवेन्द्र साहू : ऐसी कोई बात नहीं है, अगर आपका स्टोरी और कलाकार की ओरिजिनल कलाकारी हो तो जरूर इंटरटेनमेंट फिल्म को पब्लिक जरूर पसंद करेगी। फिल्म तो बहुत बनते हैं पर पब्लिक को पसंद आना चाहिए जैसे कि मेरे गुरु सतीश जैन सर जी की फिल्म जितनी बार देखोगे उतनी बार कम लगती है। ऐसी ही हमारी सुन सुन मया के धुन का स्टोरी लाजवाब है। ये फिल्म पब्लिक के डिमांड पर बार-बार चलेगी और दौड़ेगी।

एकान्त चौहान : फिल्म की कहानी और संवाद फिल्मों को कहां तक प्रभावित करते हैं?
देवेन्द्र साहू : फिल्म की कहानी राइटर, डायरेक्टर, कोरियोग्राफर, फाइट मास्टर के ऊपर होता है। जब शूट करने से पहले राइटर अपने मन में पूरी फिल्म को शूट कर लेता है। कलाकार को देखते हुए राइटर डायलॉग लिखता है क्योंकि उसके मन में पूरी फिल्म का शूट हो जाता और फिल्म कंपिलिट कर लेता है और जब फिल्म परदे में आते हैं एक-एक डायलॉग को सुनकर पब्लिक ताली और सीटी बजाती है तब डायरेक्टर और कलाकारों को पूरी तरह से संतुष्टि मिलती है। मैं सभी दर्शकों से निवेदन करता हूं कि बाकी की स्टोरी सुनने और देखने के लिए (सुन सुन मया के धुन) को आप मन नजदीकी सिनेमा घरों में जाके ये फिल्म ल देखव आऊ अपन मया दुलार बनाए रहूं।
जय जोहार… जय छत्तीसगढ़ संगवारी हो…

एकान्त चौहान : फिल्म के अन्य कलाकार?
देवेन्द्र साहू : मेरे साथ इस फिल्म में मोनिका शर्मा, ज्ञानेश हरदेल, आभा देवदास, श्रीश्टी देवांगन, रजनीश झानझी, अंजली चौहान, नकुल महिवाल, राम कुमार चौहान, उर्वशी साहू, संतोष निषाद, राजू पांडेय, रज्जू चंद्रवंशी, शिवम् साहू, सरला सेन और बहुत से सीनियर कलाकार शामिल हैं।

एकान्त चौहान : देवेन्द्र जी, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद…
देवेन्द्र साहू : आपका भी बहुत-बहुत धन्यवाद…

आपको बता दें कि सुन सुन मया के धुन छत्तीसगढ़ी फिल्म 23 अप्रैल को आपके नजदीकी सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। फिल्म के हीरो, निर्माता, निर्देशक और लेखक ज्ञानेश हरदेल जी हैं। फिल्म शुद्ध पारिवारिक होने के साथ-साथ इसमें आपको बहुत कुछ नयापन देखने को मिलेगा। इसके संवाद और प्रस्तुतिकरण दर्शकों पर एक अलग ही छाप छोड़ेंगे। फिल्म में कुल 6 गाने हैं, जो काफी कर्णप्रिय हैं। फिल्म के गीतकार आरके और सुनील सोनी हैं। संगीत भी सुनील सोनी ने ही दिया है। फिल्म के कलाकारों की बात करें तो इसमें लीड रोल में ज्ञानेश हरदेल ही होंगे। इसके अलावा अन्य कलाकारों में देवेन्द्र साहू, मोनिका शर्मा, आभा देवदास, रजनीश झांझी, नकुल महेलवार, अंजली सिंह चौहान, सरला सेन, उर्वशी साहू, कॉमेडी किंग संतोष निषाद (बोचकू), राजू पांडेय, रज्जू चंद्रवंशी, रामकुमार चौहान आदि होंगे।

Devendra Sahu