लोक सरगम लोक कलामंच के डायरेक्टर हिम्मत सिन्हा गीत लिखते व कम्पोजिंग भी खुद ही करते हैं

CGFilm.in छत्तीसगढ़ की इस पावन भूमि में लोककला संस्कृति रची बसी है। कलाकार अपनी कला को नित्य नये रूप में निखारने का प्रयास करते है। समस्याएं तो हर किसी के पास है कुछ करना है तो चुनौतियों का सामना करें और आगे बढ़े। लुप्त हो रही पूर्वजों की धरोहर को पुन: जीवित करने का काम कलाकार का होता है। राजिम माघी पुन्नी मेला के मुख्यमंच पर अपनी गायिकी से दर्शकों का दिल जीतने वाले लोक सरगम लोक कलामंच के डायरेक्टर हिम्मत सिन्हा जो छोटे से ग्राम छुईहा में पले बढ़े हैं। अपनी जबर्दस्त प्रस्तुति से लोककला को नये शिखर तक पहुंचाने का कार्य किया है।हाल ही में संपन्न राजिम माघी पुन्नी मेला में मीडिया सेन्टर से चर्चा के दौरान हिम्मत सिन्हा ने बताया कि शुरूआत में बहुत सी बाधाओं का सामना करना पड़ा। टीम तैयार करना इतना आसान नहीं होता। दर्शक पसंद ऐसा कार्यक्रम परोसना पड़ता है।

उन्होंने बताया कि छैला बाबू आही…गीत से प्रसिद्धि मिली। भारतीय दलित साहित्य अकादमी धमतरी से सम्मान मिला। मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र में अपनी प्रस्तुति दी है। टीम में 6 साल की छोटी बच्ची ग्रेसी निषाद कक्षा पहली अध्ययनरत है। बच्ची ने मीडिया टीम को अरपा पैरी के धार… राजकीय गीत को अपने सुमधुर आवाज में गाकर सुनाया। बताया कि यू-ट्यूब में मेरे 75 मिलियन लाईक है। राजिम माघी पुन्नी मेला में 2003 के बाद 2017 से निरंतर कार्यक्रम देते आ रहे हंै। टीम में कुल 40 सदस्य हैं। सभी आत्मीय भाव से रहते है एक-दूसरे को सिखाते है, उत्साह से कार्य करते है। बताया कि वे गीत लिखते हैं व कम्पोजिंग भी खुद ही करते हैं। अभी तक इन्होने 300 गीतों की रचना की है।