छत्तीसगढ़ में थियेटरों का बंद होना चिंता का विषय : लक्की रंगसाही (फिल्म वितरक)

छत्तीसगढ़ में लगातार सिनेमाघर बंद होते जा रहे हैं। अभी हाल ही में भिलाई के चंद्रा-मौर्या टॉकीजों में तालाबंदी हो गई। ये किसी जमाने में सिनेमाघर यानी थियेटर लोगों के मनोरंजन का सबसे बड़ा केंद्र हुआ करता था। आधुनिक समय में मल्टीप्लेक्स और सिनेमा के दीगर विकल्प ने सिनेमाघरों पर संकट पैदा कर दिए थे। लेकिन ऐसा नहीं है कि इसके दर्शक कम होते जा रहे हैं, फिर भी भारी-भरकम टॉकीजों का खर्च निकालना आसान भी नहीं रहा। इसलिए सिनेमाघरों पर लगातार संकट मंडरा रहा है और छत्तीसगढ़ में कई बड़े-बड़े सिनेमाघर बंद भी हो गए हैं। राजधानी रायपुर की बात करें तो यहां शारदा टॉकीज तो काफी पहले ही बंद हो चुका था, लेकिन बाबूलाल टॉकीज और आनंद टॉकीज पिछले कुछ सालो में ही बंद हुए हैं।

वहीं छत्तीसगढ़ी फिल्म वितरण से जुड़े लक्की रंगसाही ने सीजीफिल्म.इन से चर्चा करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में वैसे भी थियेटरों की कमी है। इसके बाद भी टॉकीजों का बंद होना किसी भी स्थिति में सही नहीं कहा जा सकता है। छत्तीसगढ़ में थियेटरों का बंद होना वाकई चिंता का विषय है। साथ ही उन्होंने कहा कि अभी लॉकडाउन का समय चल रहा है, इसलिए कुछ परेशानियां तो हैं ही, लेकिन किसी तरह कोरोना काल के इस समय को सतर्कता के साथ बिताना जरूरी है।
वहीं दूसरी ओर लक्की रंगसाही का कहना है कि छत्तीसगढ़ी फिल्मों के लिए ज्यादा से ज्यादा थियेटर हो तो फिल्में बहुत आसानी से और बड़ी संख्या में दर्शकों तक पहुंचेंगी। और लोग छत्तीसगढ़ी फिल्मों को भी ज्यादा से ज्यादा देखना चाहेंगे। लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा है और थियेटरों का बंद होना चिंता का विषय है। दूसरी तरफ, देखें तो थियेटरों का भारी-भरकम खर्च, बिजली का बिल और दीगर खर्चे भी लगातार बढ़ रहे हैं। इसलिए भी थियेटरों के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहे हैं।