“राजा भैया एक आवारा” के खलनायक रजनीश झांझी से cgfilm.in के रिपोर्टर शांतनु रॉय की खास बातचीत

Actor-Rajnish-Jhanjhi

Interview

Interview with Cg Film Actor Rajnish Jhanjhi Film In “Raja Bhaiya Ek Awara”

शांतनु रजनीश जी लोगों के लिए आप इस बार किस तरह का कैरेक्टर प्ले कर रहे हैं ?

रजनीश – मै हमेशा यही चाहता हूँ । कि मेरा हर तरह का कैरेक्टर लोगों को देखने को मिले. सभी फिल्मों में मेरा काम अलग तरह का हो और मैंने अलग – अलग तरह के किरदार निभाए भी हैं. राजा भैया एक आवारा भी एक अलग तरह का फिल्म है. फिल्म के डायरेक्टर इरफ़ान जी ने बहत अच्छा निर्देशन किया है । इस फिल्म में मै बाबु भाई का रोल कर रहा हूँ । जो इस फिल्म का सबसे प्रमुख विलेन है. इस फिल्म में मेरा लुक और कैरेक्टर दोनों अलग है आमतौर पर लोग विलेन को मारकाट करने वाला हि देखते हैं मगर इस फिल्म में विलेन आराम से आता है, आराम से अपना काम करता है और आराम से उसका END भी हो जाता है. बाऊ भाई एक डिफरेंट तरह का किरदार है। आपको यह देखने में बहुत मज़ा आएगा.

शांतनु – छत्तीसगढ़ी फिल्मों में क्षेत्रिय भाषाओँ का प्रयोग नहीं हो पता,इसका क्या कारन ?

रजनीश – मैं यह नहीं मानता हूँ । यह कहना उचित नहीं है. हमारा छत्तीसगढ़ बहुत बड़ा प्रदेश है यहाँ के भौगोलिक स्थिति भिन्न तो है ही साथ-साथ भाषा का क्षेत्रिय प्रभाव भी अलग – अलग है जैसे हम लोग अंबिकापुर के तरफ जाते हैं तब उधर भोजपुरी सुनने को मिलता है महासमुंद में उड़िया, बस्तर में अलग ही भाषा है. वहां गोंडी और हल्बी बोलते हैं. बिलासपुर और दुर्ग तरफ का लहजा ही कुछ अलग है. शहरी भाषा भी अलग है हमको पुरे छत्तीसगढ़ में व्यापार करना है तो सिनेमा में भाषा को लेकर हमें न्यूट्रल रहना पड़ता है जो छत्तीसगढ़ी नहीं जानता उसे भी फिल्म समझ आ जाता है. छत्तीसगढ़ फिल्म इंडस्ट्री प्रदेश की संस्कृति, परंपरा, पर्यटन, कला, भाषा, साहित्य के रक्षा के लिए सत् प्रयत्नशील है । सिनेमा संस्कृति के प्रचार के लिए एक सशक्त माध्यम है. जिसके लिए पुरा इंडस्ट्री लगा हुआ है ।

शांतनु – छत्तीसगढ़ी फिल्मों का सफर आपके हिसाब से कैसा रहा ?   

रजनीश – छत्तीसगढ़ी फिल्मों का सफर बहुत ही शानदार और तूफानी शुरुआत हुआ है. 1970  – 71 का दौर ही अलग रहा है । उस समय जातिगत आन्दोलन उठ गया था । इंदिरा गाँधी जी के बीच बचाव करने से वह मामला सुलझ गया था. इसके बाद काफी लम्बे समय तक काम नहीं हुआ सन 2000 में छत्तीसगढ़ अलग राज्य बना तब मोर छईयां भुइंया जैसे फिल्म बनना शुरू हुआ सतीश भैया छत्तीसगढ़ी फिल्म के लिए गॉड फादर हैं । आज इस इंडस्ट्री के लाखों घरों में उनके ही कारन चुल्हा जल रहा है मोर छईयां भुइंया, मया, झन भूलौ माँ बाप ल, लैला टिपटॉप, तुरा चाय वाला, टुरा रिक्शा वाला जैसे बहुत सारे फिल्म जो सफल हुए हैं । सतीश भैया असफल होने वाला कोई काम ही नहीं करते हैं ।  

सन 1971 से सन 2000 तक के समयांतराल में बहुत से कलाकार हुए थे जिनका प्रतिभा सामने नहीं आ पाया. अब 2000 के बाद का दौर बिलकुल अलग है थोडा उतार चढ़ाव तो रहता ही है बीच में दो बार और इंडस्ट्री बैठ गया था. कुछ काम नहीं हो रहा था. हम लोग काफी निराश हो गए थे । झन भूलौ माँ बाप ल के सिल्वर जुबली के बाद लगा कि अब हमको काम मिलेगा । इंडस्ट्री तूफ़ान मचाएगा मगर इंडस्ट्री अचानक से कैसे बैठ गया पता ही नही. कुछ साल बाद मया आया फिर वहां से छत्तीसगढ़ी फिल्म इंडस्ट्री ने जो रफ़्तार पकड़ा है वह आज तक कम नहीं हुआ है ।

हमारा इंडस्ट्री दिन – प्रतिदिन आगे बढ़ रहा है हमारे पास उस समय कोई फैसेलिटी नहीं था लेकिन आज गली गली में स्टूडियों है । इंडस्ट्री जबरदस्त काम कर रहा है हंस झन पगली फंस जबे ने तो पूरा रिकॉर्ड ही तोड़ दिया . जिसका अभी भोजपुरी रीमेक भी बन रहा है ।

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शांतनु – छालीवुड फिल्म इंडस्ट्री में आपको लगभग 20 साल हो गए हैं. इंडस्ट्री का भविष्य आपके हिसाब से आगे कैसा रहेगा?

रजनीश – मेरे नजरिये में इंडस्ट्री का भविष्य बहुत अच्छा रहेगा. पहले बहुत कम थियेटर थे लेकिन अब बढ़ते – बढ़ते 40 से भी ज्यादा थियेटर हो गएँ हैं. आज हमारे पास सब कुछ है । पूरा फिल्म यहाँ बना सकते हैं. पोस्ट प्रोडक्शन भी यहाँ कर सकते है. हमारे एक्टिंग सेटअप. डबिंग स्टूडियो का भरमार है. आज के समय में जिस भी शहर जाएँ वहां डबिंग, एडिटिंग कर सकते हैं. बस अब सेंसर कराने के लिए बहार जाना पड़ता है. हम प्रयास कर रहे हैं. हमारे यहाँ भी एक सेंसर बोर्ड हो. जैसे उड़ीसा और साऊथ वालों का अपना सेंसर हैं सरकार से हम लोग आग्रह करते रहते हैं । कुछ दिन पहले अंबिकापुर में मैंने संस्कृति मंत्री अमरजीत सिंह भगत जी के पास अपना बात रखा था । उनसे छत्तीसगढ़ में मिनी थियेटर के लिए आग्रह किया था. जय ललिता ने जिस तरह अम्मा थियेटर चालु किया था. उसी तरह यहाँ भी होना चाहिए. इससे हमारा इंडस्ट्री कई कोस आगे बढ़ सकता है ।

शांतनु – रंगोबती में अनुज शर्मा का किरदार बहुत अलग था. इस फिल्म में अब उनका किरदार कैसा है ?

रजनीश – कोई औपचारिकता बिना यदि मैं अपनी बात कहूँ तो सहीं बात यह है कि हमारे अनुज भाई बहुत शालीन व्यक्ति हैं. जमीनी इंसान हैं, संस्कृति को समझते हैं. वे हमारे पहले सुपर स्टार हैं. उनका सम्मान करना चाहिए रंगोबती में उनका किरदार बहुत अलग था. बहुत ज्यदा तो नहीं पर रंगोबती के कैरेक्टर से अनुज भाई के इमेज को थोडा फर्क पड़ा था लेकिन मुझे लगता है राजा भैया एक आवारा और सॉरी लव यू जान ये दो फिल्म अनुज भाई का कम बैक फिल्म है. वे उसी तरह से मार्केट में रहेंगे जैसे पहले थे

शांतनु – दाऊ मंदराजी फिल्म को लेकर आपका क्या राय है ?

रजनीश – मैं उन सभी कलाकारों को सलाम कर्ता हूँ. जन्होने इस फिल्म में काम किया किया है । बायोपिक करना कोई सरल काम नहीं है. इस फिल्म में सभी ने सुन्दर काम किया है. जहाँ तक मैं समझता हूँ छत्तीसगढ़ के दर्शकों में गंभीर विषयों को स्वीकार करने की क्षमता कम है जैसे हम फिम निर्माण कर रहे हैं । उसी तरह दर्शकों का भी निर्माण हो रहा है, अभी हमको दर्शकों के हिसाब से मूवी बनाना पद रहा है । सतीश भैया का सफल मूवी करने का कारण यही है कारण कि दर्शकों को अछे से समझते हैं दाऊ मंदराजी एक सफल प्रेस है मैं चाहता हूँ । कि ऐसे गंभीर काम और भी होने चाहिए.

शांतनु – राज भैया एक आवारा फिल्म कब आ रह है ?

रजनीश – हम आपके माध्यम से दर्शकों बताना चाहेंगे कि हमारा यह फिल्म 28 अक्टूबर को रिलीज होगा. आप लोग यह फिल्म जरुर देखिएगा । सभी अच्छे कलरों ने इस फिल्म में काम किया है. इरफ़ान जी ने इस फिल्म को बहुत अच्छा निर्देशित किया है. एक बार फिर यही कहूँगा कि आप सभी यह फिल्म जरुर देखें ।

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