मेरे लिए कॉमेडी खाने में नमक या तड़का जैसा, जिससे स्वाद और बढ़ जाए : डॉ. चंदन सिंह

मेरे लिए कॉमेडी खाने में नमक या तड़का जैसा, जिससे स्वाद और बढ़ जाए : डॉ. चंदन सिंह

शुद्ध पारिवारिक फिल्म सुन सुन मया के धुन… में कॉमेडी का रोल करने वाले डॉ. चंदन सिंह से Cgfilm.in की विशेष चर्चा…

CGFilm (एकान्त चौहान) – यूं तो एक फिल्म में कई कलाकार होते हैं और सबका किरदार भी अलग-अलग होता है। इसमें भी एक किरदार आता कॉमेडियन का, जो सबसे कठिन होता है। ऐसा इसलिए भी है कि दर्शकों को हंसाना और उनका मनोरंजन करना आसान नहीं होता है। लेकिन पूरी फिल्म के दौरान कॉमेडियन अपनी एक अलग ही पहचान छोड़ते हैं, जो दर्शकों को थियेटर के अंदर भी और बाहर भी गुदगुदाते रहते हैं। तो चलिए आज हम बात करते हैं छत्तीसगढ़ी फिल्म सुन सुन मया के धुन में कॉमेडी का जलवा बिखेरने वाले डॉ. चंदन सिंह की। जिन्होंने इस फिल्म में दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया है।
इससे पहले आपको बता दें कि सुन सुन मया के धुन छत्तीसगढ़ी फिल्म 30 अप्रैल को आपके नजदीकी सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। फिल्म के हीरो, निर्माता, निर्देशक और लेखक ज्ञानेश हरदेल जी हैं। फिल्म शुद्ध पारिवारिक होने के साथ-साथ इसमें आपको बहुत कुछ नयापन देखने को मिलेगा। इसके संवाद और प्रस्तुतिकरण दर्शकों पर एक अलग ही छाप छोड़ेंगे। फिल्म में कुल 6 गाने हैं, जो काफी कर्णप्रिय हैं। फिल्म के गीतकार आरके और सुनील सोनी हैं। संगीत भी सुनील सोनी ने ही दिया है। फिल्म के कलाकारों की बात करें तो इसमें लीड रोल में ज्ञानेश हरदेल ही होंगे। इसके अलावा अन्य कलाकारों में देवेन्द्र साहू, मोनिका शर्मा, आभा देवदास, रजनीश झांझी, नकुल महेलवार, अंजली सिंह चौहान, सरला सेन, उर्वशी साहू, कॉमेडी किंग संतोष निषाद (बोचकू), राजू पांडेय, रज्जू चंद्रवंशी, रामकुमार चौहान आदि होंगे। प्रस्तुत है Cgfilm.in से डॉ. चंदन सिंह की खास बातचीत के कुछ अंश:-

एकान्त चौहान : फिल्म सुन सुन मया के धुन… में अपने किरदार के बारे में बताइए?
डॉ. चंदन सिंह : जी, सुन सुन मया के धुन में मैं बिरजू भाई के एक बहुत ही अहम् किरदार में हूँ जो कि बहुत ही रोचक और मजेदार किरदार है और ये एक हास्य चरित्र है। बिरजू के बारे में आपको अभी इतना ही बता सकता हूँ बाकि आप फिल्म देख कर समझ जायेंगे।

एकान्त चौहान : क्या कॉमेडी के प्रति आपका रुझान शुरू से ही रहा है?
डॉ. चंदन सिंह : हां, जी… मुझे कॉमेडी और नेगेटिव रोल्स हमेशा से ही आकर्षित करते रहे हैं और इस फिल्म में मुझे अच्छा मौका मिला। मैं एक कत्थक नर्तक भी हूँ तो मुझे भावों (expression) से खेलना सिखाया गया है, और कॉमेडी करना मेरे स्वभाव में है तो मैंने अपने चेहरे के भावों से कॉमेडी करने की कोशिश की है जो की एक्सपेरिमेंटल भी है और ये चरित्र मेरे खुद के चरित्र से जैसा भी है तो यही कारण है की मैं इसे करने में सफल हुआ।

एकान्त चौहान : आज के दौर में दर्शकों को हंसाना बड़ा कठिन काम है? आपको भी ऐसा लगता है?
डॉ. चंदन सिंह : हां भी और नहीं भी.. पर ये जरूर बोलूंगा की अच्छी और स्वस्थ कॉमेडी को दर्शकों ने हमेशा सराहा है और इसमें वही कॉमेडी है। फूहड़ता से दूर इस फिल्म में स्वस्थ कॉमेडी है। दक्षिण की फिल्मों में कॉमेडी बहुत लाउडर होती है और उस से वो लोगो को हँसाने का काम करती है पर मैंने यहा अपने एक्सप्रेशन से लोगों को हँसाने की कोशिश की है… इस तरह लोगों को हंसाना मेरे लिए बहुत ही आसान है।

एकान्त चौहान : एक कॉमेडियन का हर मूवमेंट दर्शकों को अपनी ओर खींचता है? तो आप बतौर कॉमेडियन कुछ कहना चाहेंगे?
डॉ. चंदन सिंह : जी हां, सही कहा अपने… मैं कॉमेडी को खाने में नमक या तड़का समझता हूँ जिससे खाने का स्वाद और बढ़ जाता है।

एकान्त चौहान : सुन सुन मया के धुन…फिल्म आपको कैसी मिली?
डॉ. चंदन सिंह : ये एक इत्तेफाक ही था की मेरे एक भईया के घर में इस फि़ल्म की चर्चा चल रहीं थी तभी मैं वहां पंहुचा और कास्टिंग की बात चल रहीं थी तो मुझसे पूछा गया कि इंट्रेस्टेड हो क्या मैंने एकदम हां कहा और दूसरे दिन ज्ञानेश भईया के सामने था बस बात बन गई।

एकान्त चौहान : एक कॉमेडियन का किरदार जहां शूटिंग में या शूटिंग के बाद भी खूब हंसाता है? फिल्म के दौरान ऐसा कुछ वाक्या हुआ क्या?
डॉ. चंदन सिंह : हां, जी… कई बार हुआ सेट पर। इस किरदार को गढ़ते हुए कई हास्य के पुट निकल आते थे कि हम सब लोटपोट हो जाते थे। ज्ञानेश भईया ने इसको गढ़ा ही ऐसा है।

एकान्त चौहान : बॉलीवुड में आप किस कॉमेडियन से ज्यादा प्रभावित हैं?
डॉ. चंदन सिंह : लिस्ट बहुत लम्बी है सरजी, पर फिर भी मैं एकदम पीछे से शुरू करता हूँ तो मुकरी साहब, महमूद साहब, असित सेन जी, जॅानी लिवर जी, और मेरे सबसे चाहते मरहूम कादर खान साहब, उनकी टाइमिंग कमाल थी।

एकान्त चौहान : छत्तीसगढ़ी फिल्मों के भविष्य को लेकर आपकी राय?
डॉ. चंदन सिंह : बहुत ही उज्जवल है। तकनीक पर अब बहुत अच्छा काम हो रहा है। इसी विजन को आप ज्ञानेश भईया की सुन सुन मया के धुन में देखेंगे।

एकान्त चौहान : फिल्म सुन सुन मया के धुन को लेकर आपकी उम्मीदें?
डॉ. चंदन सिंह : बहुत उम्मीदे हैं। इसकी सफलता के लिए मैं आश्वस्त हूँ और ईश्वर से प्रार्थना भी करता हूँ।

एकान्त चौहान : अपने फिल्मी कैरियर के बारे कुछ बताइए?
डॉ. चंदन सिंह : छॉलीवुड में मैं 2003 से हूं। प्रसिद्ध डायरेक्टर प्रेम चंद्राकर जी के साथ का तैं जादू करें से धमाकेदार शुरुआत हुई थी। पर मैं एक कत्थक नर्तक भी हूँ तो उसको ले के कुछ साल गोवा में शिफ्ट हो गया था, तो फिल्में छूट गई थीं। अब फिर से शुरूआत की है। वैसे मैंने स्टार प्लस के सावधान इंडिया में भी काम किया है। प्रणव झा जी के साथ भी काम किया।

एकान्त चौहान : आपकी आने वाली और फिल्में?
डॉ. चंदन सिंह : दो फिल्मों की बातचीत चल रही है। नाम और डेट फिलहाल फाइनल नहीं हुआ। इन फिल्मों में मैं खलनायक की भूमिका में रहूँगा।

एकान्त चौहान : डॉ. चंदन सिंह जी, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।
डॉ. चंदन सिंह : आपका भी धन्यवाद…

Dr. Charan Singh

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